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What is GST?

जानिए क्या है जीएसटी?                  

 क्या है जीएसटी?                  
जीएसटी का पूरा नाम है गुड्स एंड सर्विस टैक्स। यह एक अप्रत्यक्ष कर (इंडायरेक्ट टैक्स) है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जीएसटी लागू होने से पहले वस्तुओं और सेवाओं पर केंद्र और राज्यों द्वारा अलग-अलग टैक्स लगाये जाते थे। जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट / सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्ज़री टैक्स, आदि खत्म हो जाएंगे। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी।
 

कितने तरह के हैं जीएसटी

जीएसटी तीन तरह के हैं:
1.सीजीएसटी (सेंट्रल जीएसटी): सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार वसूलेगी।

2.एसजीएसटी (स्टेट जीएसटी): एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी।
gst bill passed by lok sabha

संवैधानिक पहलू

जीएसटी लागू होने के पूर्व भारतीय संविधान के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं। मुख्य रूप से वस्तुओं की बिक्री पर कर लगाने का अधिकार राज्य सरकार और वस्तुओं के उत्पादन व सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इस कारण देश में अलग अलग तरह प्रकार के कर लागू है, जिससे देश की वर्तमान कर व्यवस्था बहुत ही जटिल है। कंपनियों और छोटे व्यवसायों के लिए विभिन्न प्रकार के कर कानूनों का पालन करना एक मुश्किल होता है। इसी जटिल व्यवस्था को हल करने के लिए मोदी सरकार ने 122वां संविधान संशोधन विधेयक (अनुछेद 246, 248 एवं 268 इत्यादि में संशोधन) दिसंबर, 2014 में संसद में पेश किया। इस संशोधन विधेयक के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा। सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी।
जीएसटी पास करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया

लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पारित हो जाने के बाद जीएसटी को लागू करने के लिए 29 राज्यों में से आधे से अधिक राज्यों यानी 15 राज्यों की स्वीकारिता चाहिए। उसके बाद यह मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
जीएसटी का इतिहास

पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किये गये प्रयास

भारत में जीएसटी का विचार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा सन् 2000 में लाया गया। सरकार के दोनों सदनों में बहुमत नहीं होने की वजह से पारित नहीं हो सका। यूपीए सरकार के तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदम्बरम द्वारा फरवरी, 2007 में ठोस शुरुआत करते हुए मई, 2007 में जीएसटी के लिए राज्यों के वित्तमंत्रियों की संयुक्त समिति का गठन किया। राज्यों के बीच विरोधाभास होने पर अप्रैल, 2010 से कांग्रेस सरकार इसे लागू कराने में विफल रही। तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा मार्च, 2011 में 115वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया, जो गठबंधन सरकार के युग में विपक्ष के विरोध की वजह से पारित नहीं हो सका।
वर्तमान सरकार के प्रयास

देश में जीएसटी लागू करने के लिए मोदी सरकार ने 122वां संविधान संशोधन विधेयक (अनुछेद 246, 248 एवं 268 इत्यादि में संशोधन) दिसंबर, 2014 में संसद में पेश किया, जिसे लोकसभा द्वारा मई, 2015 में पारित कर दिया गया। 4 अगस्त, 2016 को राज्यसभा ने भी जीएसटी बिल को पारित कर दिया। जीएसटी के लिए संविधान संशोधन बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा यानी पूर्ण बहुमत से जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है। लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पारित हो जाने के बाद जीएसटी को लागू करने के लिए अगला कदम था (कम-से-कम) 15 राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदन। 25 अगस्त, 2016 को जीएसटी के लिए 122वें संविधान संशोधन विधेयक का अनुमोदन करने वाला देश का पहला राज्‍य असम बना। इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, असम, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, नागालैंड, मिजोरम, तेलंगाना, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा की विधान सभाओं सहित कुल 19 राज्यों ने जीएसटी विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।
वर्तमान स्थिति

चुकी दोनों सदनों द्वारा इस संशोधन विधेयक के पारित कर देने के बाद सरकार द्वारा विधेयक में कुछ और संशोधन किये गये जिसके लिए सरकार ने विधेयक को पुनः लोकसभा में 29 मार्च को पास कराया। लोकसभा से पारित होने के बाद इस बिल को 6 अप्रैल को राज्यसभा ने भी पारित कर दिया। इस बार इस विधेयक को धन विधेयक के रूप में पेश किया गया था इसलिए भारतीय संविधान के अनुसार राज्य सभा में पारित होना या न होना महज एक औपचारिकता भर थी। राज्यसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अब देश के सभी राज्य ‘स्टेट जीएसटी’ विधेयक पास करेंगे और फिर पूरे देश में लागू होगी एक राष्ट्र एक टैक्स व्यवस्था। इस व्यवस्था से केन्द्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाले वैट सहित कई अन्य कर जीएसटी में शामिल हो जाएंगे।
जीएसटी व्यवस्था में कर की दर

जीएसटी व्यवस्था में कर की दरों 5 स्लैब में विभक्त किया गया है। 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत। खाने-पीने की अहम चीजों पर 0% टैक्स होगा जबकि नुकसानदेह या लक्जरी वाली चीज़ों पर अधिक टैक्स रखा गया है। सरकार जीएसटी को एक जुलाई 2017 से लागू करने की तैयारी कर रही है।
information, history, benefits about gst in hindi

जीएसटी से प्रस्तावित लाभ

किसी भी राज्य में सामान का एक दाम

पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। जैसे कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते हैं तो उसकी कीमत अलग होती है, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा।
कर विवाद में कमी

कर की वसूली करते समय अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जाएगी। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे।
कम होगी कीमत

राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएंगे। फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 5-28 प्रतिशत (जीएसटी परिषद् द्वारा तय किया गया है) पर आ जायेगा। कंपनियों और व्यापारियों को अपना माल एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई अतिरिक्त कर नहीं चुकाना होगा। इससे सामान बनाने की

लागत घटेगी।
टैक्स पर टैक्स की व्यवस्था समाप्त होगी

पूरे देश में एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष कर होगा जिससे व्यवसायियों को ख़रीदी गयी वस्तुओं और सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी की पूरी क्रेडिट मिल जाएगी। इसका उपयोग वह बेचीं गयी वस्तुओं और सेवाओं पर लगे जीएसटी के भुगतान में कर सकेगा। इससे टैक्स पर टैक्स लगाने की व्यवस्था समाप्त होगी।
विदेशी निवेशकों को आसानी

भारत एक बड़े और एकीकृत बाज़ार के रूप में तब्दील होगा और जटिल करारोपण खत्म होने से विदेशी निवेशकों को आसानी होगी। वे भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होगे।
काले धन से निबटने के लिए हथियार

लोगों के लिए करों की चोरी कर पाना आसान नहीं होगा, इसीलिये जीएसटी को काले धन से निबटने के के लिए मज़बूत हथियार के तौर पर देखा जा रहा है।
अतर-राज्यीय व्यापर में आसानी

अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी।
 

जीएसटी परिषद् का कार्य

विधेयक में जीएसटी का मसौदा तैयार करने के लिए जीएसटी परिषद् गठित करने का प्रावधान किया गया है। इस मसौदे के आधार पर सरकार केंद्रीय जीएसटी विधेयक लाएगी जिसमें कर की दर तथा उसकी वसूली के तौर-तरीके शामिल होंगे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की 22 अक्टूबर को हुई बैठक में जीएसटी परिषद के गठन को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में इस परिषद का गठन किया है। इस परिषद में सभी 29 राज्य और संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हैं। इस परिषद में सदस्य के तौर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के अलावा राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं।

जीएसटी परिषद् में केंद्र का एक तिहाई मत होगा। जबकि राज्यों का इसमें दो तिहाई मत होगा। किसी भी सहमति पर पहुंचने के लिए तीन चौथाई बहुमत जरूरी होगा। यह बता देना आवश्यक है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विधेयक पर अपनी सहमति प्रदान कर दी थी। उसके बाद ही इस परिषद के गठन का रास्ता साफ हुआ।
श्रीनगर में जीएसटी परिषद की14वीं बैठक

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 14वीं बैठक 18-19 मई को श्रीनगर में आयोजित की गई। यह बैठक जीएसटी की दरें तय करने के लिए थी। परिषद की इस बैठक, कुल 1,211 वस्तुओं में से छह को छोड़कर अन्य के लिए कर की दरों का निर्धारण कर लिया गया। इस बैठक में दूध और अनाज को जीएसटी मुक्त रखा गया है। बालों के तेल, साबुन, टूथपेस्ट पर 18 प्रतिशत, कोयला, चीनी, चाय, कॉफी, खाद्य तेल पर भी 5 प्रतिशत के स्लैब में रखा गया। जीएसटी काउंसिल की बैठक के दूसरे दिन सेवाओं पर कर की दरें तय की गई। प्रमुख दरों में शिक्षा और स्वास्य सेवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया। फाइनेंशियल सर्विसेज 18 फीसद टैक्स स्लैब में रखा गया।

जीएसटी का पूरा नाम है गुड्स एंड सर्विस टैक्स। यह एक अप्रत्यक्ष कर (इंडायरेक्ट टैक्स) है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जीएसटी लागू होने से पहले वस्तुओं और सेवाओं पर केंद्र और राज्यों द्वारा अलग-अलग टैक्स लगाये जाते थे। जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट / सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्ज़री टैक्स, आदि खत्म हो जाएंगे। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी।
 

कितने तरह के हैं जीएसटी

जीएसटी तीन तरह के हैं:
1.सीजीएसटी (सेंट्रल जीएसटी): सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार वसूलेगी।

2.एसजीएसटी (स्टेट जीएसटी): एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी।
gst bill passed by lok sabha

संवैधानिक पहलू

जीएसटी लागू होने के पूर्व भारतीय संविधान के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं। मुख्य रूप से वस्तुओं की बिक्री पर कर लगाने का अधिकार राज्य सरकार और वस्तुओं के उत्पादन व सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इस कारण देश में अलग अलग तरह प्रकार के कर लागू है, जिससे देश की वर्तमान कर व्यवस्था बहुत ही जटिल है। कंपनियों और छोटे व्यवसायों के लिए विभिन्न प्रकार के कर कानूनों का पालन करना एक मुश्किल होता है। इसी जटिल व्यवस्था को हल करने के लिए मोदी सरकार ने 122वां संविधान संशोधन विधेयक (अनुछेद 246, 248 एवं 268 इत्यादि में संशोधन) दिसंबर, 2014 में संसद में पेश किया। इस संशोधन विधेयक के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा। सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी।
जीएसटी पास करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया

लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पारित हो जाने के बाद जीएसटी को लागू करने के लिए 29 राज्यों में से आधे से अधिक राज्यों यानी 15 राज्यों की स्वीकारिता चाहिए। उसके बाद यह मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
जीएसटी का इतिहास

पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा किये गये प्रयास

भारत में जीएसटी का विचार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा सन् 2000 में लाया गया। सरकार के दोनों सदनों में बहुमत नहीं होने की वजह से पारित नहीं हो सका। यूपीए सरकार के तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदम्बरम द्वारा फरवरी, 2007 में ठोस शुरुआत करते हुए मई, 2007 में जीएसटी के लिए राज्यों के वित्तमंत्रियों की संयुक्त समिति का गठन किया। राज्यों के बीच विरोधाभास होने पर अप्रैल, 2010 से कांग्रेस सरकार इसे लागू कराने में विफल रही। तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा मार्च, 2011 में 115वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया, जो गठबंधन सरकार के युग में विपक्ष के विरोध की वजह से पारित नहीं हो सका।
वर्तमान सरकार के प्रयास

देश में जीएसटी लागू करने के लिए मोदी सरकार ने 122वां संविधान संशोधन विधेयक (अनुछेद 246, 248 एवं 268 इत्यादि में संशोधन) दिसंबर, 2014 में संसद में पेश किया, जिसे लोकसभा द्वारा मई, 2015 में पारित कर दिया गया। 4 अगस्त, 2016 को राज्यसभा ने भी जीएसटी बिल को पारित कर दिया। जीएसटी के लिए संविधान संशोधन बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा यानी पूर्ण बहुमत से जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है। लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पारित हो जाने के बाद जीएसटी को लागू करने के लिए अगला कदम था (कम-से-कम) 15 राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अनुमोदन। 25 अगस्त, 2016 को जीएसटी के लिए 122वें संविधान संशोधन विधेयक का अनुमोदन करने वाला देश का पहला राज्‍य असम बना। इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, असम, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, नागालैंड, मिजोरम, तेलंगाना, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा की विधान सभाओं सहित कुल 19 राज्यों ने जीएसटी विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।
वर्तमान स्थिति

चुकी दोनों सदनों द्वारा इस संशोधन विधेयक के पारित कर देने के बाद सरकार द्वारा विधेयक में कुछ और संशोधन किये गये जिसके लिए सरकार ने विधेयक को पुनः लोकसभा में 29 मार्च को पास कराया। लोकसभा से पारित होने के बाद इस बिल को 6 अप्रैल को राज्यसभा ने भी पारित कर दिया। इस बार इस विधेयक को धन विधेयक के रूप में पेश किया गया था इसलिए भारतीय संविधान के अनुसार राज्य सभा में पारित होना या न होना महज एक औपचारिकता भर थी। राज्यसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अब देश के सभी राज्य ‘स्टेट जीएसटी’ विधेयक पास करेंगे और फिर पूरे देश में लागू होगी एक राष्ट्र एक टैक्स व्यवस्था। इस व्यवस्था से केन्द्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाले वैट सहित कई अन्य कर जीएसटी में शामिल हो जाएंगे।
जीएसटी व्यवस्था में कर की दर

जीएसटी व्यवस्था में कर की दरों 5 स्लैब में विभक्त किया गया है। 0, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत। खाने-पीने की अहम चीजों पर 0% टैक्स होगा जबकि नुकसानदेह या लक्जरी वाली चीज़ों पर अधिक टैक्स रखा गया है। सरकार जीएसटी को एक जुलाई 2017 से लागू करने की तैयारी कर रही है।
information, history, benefits about gst in hindi

जीएसटी से प्रस्तावित लाभ

किसी भी राज्य में सामान का एक दाम

पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। जैसे कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते हैं तो उसकी कीमत अलग होती है, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा।
कर विवाद में कमी

कर की वसूली करते समय अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जाएगी। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे।
कम होगी कीमत

राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएंगे। फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 5-28 प्रतिशत (जीएसटी परिषद् द्वारा तय किया गया है) पर आ जायेगा। कंपनियों और व्यापारियों को अपना माल एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई अतिरिक्त कर नहीं चुकाना होगा। इससे सामान बनाने की

लागत घटेगी।
टैक्स पर टैक्स की व्यवस्था समाप्त होगी

पूरे देश में एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष कर होगा जिससे व्यवसायियों को ख़रीदी गयी वस्तुओं और सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी की पूरी क्रेडिट मिल जाएगी। इसका उपयोग वह बेचीं गयी वस्तुओं और सेवाओं पर लगे जीएसटी के भुगतान में कर सकेगा। इससे टैक्स पर टैक्स लगाने की व्यवस्था समाप्त होगी।
विदेशी निवेशकों को आसानी

भारत एक बड़े और एकीकृत बाज़ार के रूप में तब्दील होगा और जटिल करारोपण खत्म होने से विदेशी निवेशकों को आसानी होगी। वे भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होगे।
काले धन से निबटने के लिए हथियार

लोगों के लिए करों की चोरी कर पाना आसान नहीं होगा, इसीलिये जीएसटी को काले धन से निबटने के के लिए मज़बूत हथियार के तौर पर देखा जा रहा है।
अतर-राज्यीय व्यापर में आसानी

अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी।
 

जीएसटी परिषद् का कार्य

विधेयक में जीएसटी का मसौदा तैयार करने के लिए जीएसटी परिषद् गठित करने का प्रावधान किया गया है। इस मसौदे के आधार पर सरकार केंद्रीय जीएसटी विधेयक लाएगी जिसमें कर की दर तथा उसकी वसूली के तौर-तरीके शामिल होंगे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की 22 अक्टूबर को हुई बैठक में जीएसटी परिषद के गठन को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में इस परिषद का गठन किया है। इस परिषद में सभी 29 राज्य और संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हैं। इस परिषद में सदस्य के तौर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के अलावा राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं।

जीएसटी परिषद् में केंद्र का एक तिहाई मत होगा। जबकि राज्यों का इसमें दो तिहाई मत होगा। किसी भी सहमति पर पहुंचने के लिए तीन चौथाई बहुमत जरूरी होगा। यह बता देना आवश्यक है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विधेयक पर अपनी सहमति प्रदान कर दी थी। उसके बाद ही इस परिषद के गठन का रास्ता साफ हुआ।
श्रीनगर में जीएसटी परिषद की14वीं बैठक

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 14वीं बैठक 18-19 मई को श्रीनगर में आयोजित की गई। यह बैठक जीएसटी की दरें तय करने के लिए थी। परिषद की इस बैठक, कुल 1,211 वस्तुओं में से छह को छोड़कर अन्य के लिए कर की दरों का निर्धारण कर लिया गया। इस बैठक में दूध और अनाज को जीएसटी मुक्त रखा गया है। बालों के तेल, साबुन, टूथपेस्ट पर 18 प्रतिशत, कोयला, चीनी, चाय, कॉफी, खाद्य तेल पर भी 5 प्रतिशत के स्लैब में रखा गया। जीएसटी काउंसिल की बैठक के दूसरे दिन सेवाओं पर कर की दरें तय की गई। प्रमुख दरों में शिक्षा और स्वास्य सेवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया। फाइनेंशियल सर्विसेज 18 फीसद टैक्स स्लैब में रखा गया।

Implementation of GST will expand Indian economy by 1% – via NMApp:


Implementation of GST will expand Indian economy by 1%

http://www.indiainfoline.com/article/news-top-story/gst-expand-economy-implementation-of-gst-will-expand-indian-economy-by-1-117032200462_1.html via NMApp

World Water Day and Economics

World Water Day

“In Economics We Learn that we have to save Natural Resources For Our Future Generation

LEARN Economics Save Water

Defination Of Economics

Mr. Sumit Dubey Found his Own Defination about Economics

Learners Comments and views are most Welcome

Economics- Science of Human Survival in Society

Economics is A Branch of Entire Human Knowledge That Teach Humans How to use Scare Resources Economically for Satisfying Our Present Needs to survive and Grow and

 At the same time How to Create Values in Natural Resources for Future Human Generation

Sumit Rajendra Dubey

Click Here to know

https://drive.google.com/file/d/0B7CDkRyDz2pWZnZLRWd2REdGX2c/view?usp=drivesdk

What is Economics ??

Economics is A Branch of Entire Human Knowledge That Teach Humans How to use Scare Resources Economically for Satisfying Our Present Needs to survive and Grow and

 At the same time How to Create Values in Natural Resources for Future Human Generation
Sumit Rajendra Dubey


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http://wp.me/p8vs34-12
18 march 2017

संसद ने आज शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी जिसमें युद्ध के बाद पाकिस्तान एवं चीन पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गयी संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं।

नयी दिल्ली: संसद ने आज शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी जिसमें युद्ध के बाद पाकिस्तान एवं चीन पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गयी संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं।

लोकसभा ने शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक 2017 में राज्यसभा में किए गए संशोधनों को मंजूरी प्रदान करते हुए इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। राज्यसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। यह विधेयक इस संबंध में सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा। निचले सदन ने इस बारे में आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन द्वारा रखे गए शत्रु सम्पत्ति संशोधन और विधिमान्यकरण पांचवां अध्यादेश 2016 का निरुनुमोदन करने वाले संकल्प को अस्वीकार कर दिया।

जब किसी देश के साथ युद्ध होता है तो उसे शत्रु माना जाता है
इस बारे में हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी सरकार को अपने शत्रु राष्ट्र या उसके नागरिकों को संपत्ति रखने या व्यावयायिक हितों के लिए मंजूरी नहीं देनी चाहिए। शत्रु संपत्ति का अधिकार सरकार के पास होना चाहिए न कि शत्रु देशों के नागरिकों के उत्तराधिकारियों के पास। उन्होंने कहा कि जब किसी देश के साथ युद्ध होता है तो उसे शत्रु माना जाता है और शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक 2017’ को 1962 के भारत चीन युद्ध, 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध और 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

Source – Internet

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